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jyotsnasingh


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आज रंग है—

Posted On: 24 Mar, 2016  
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अभिव्यक्ति की आज़ादी—

Posted On: 16 Feb, 2016  
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देश मेरे—(गणतंत्र दिवस पर )

Posted On: 26 Jan, 2016  
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इतनी नफरत —(दहशतगर्दों से मुखातिब)

Posted On: 28 Nov, 2015  
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क्या होगा सांड पिता का—

Posted On: 25 Nov, 2015  
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भूख के पहिये —-

Posted On: 2 Oct, 2015  
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आतिश—-

Posted On: 26 Sep, 2015  
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शिक्षक दिवस —-

Posted On: 6 Sep, 2015  
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नटखट कान्हा

Posted On: 5 Sep, 2015  
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क्षितिज—–

Posted On: 11 Jul, 2015  
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आज भी गाँवों कि खाप पंचायतें सदियों पुराने तौर तरीके अपनाती हैं खास तौर पर औरतों के बारे में !भ्रूण हत्या के द्वारा लड़कियों को जन्म ही नहीं लेने दिया जाता ,जब कि अगर वो प्रेम विवाह करलें तो उन्हें उनके मातापिता या रिश्ते दार अपने हाथों से ही मार डालते हैं घर कि इज़ज़त के नाम पर !ऐसा नहीं है कि गावों कि महिलाएं लड़ती नहीं या बिलकुल ही बोलती नहीं वो ऐसा करती हैं पर अधिकतर महिलाओं के के खिलाफ ही यानि बहु और सास ,ननद और भाभी,जेठानी और देवरानी छोटे छोटे हक़ कि लड़ाई! क्यूँ नहीं वो इस सब से ऊपर हो कर अपने अधिकारों के लिए लड़ती जैसे शिक्षा का अधिकार ये एक ऐसा अधिकार है जिस कि सहायता से वो अपने अन्य छीने गए अधिकार प्राप्त कर सकती हैं!बहुत विचारणीय आलेख.ये मुद्दा उठाने के लिए आपको बधाई.

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ज्योतसना जी बहुत अच्छा लिखा आपने तथा वास्तविकता भी है। किन्तु एक बात कि घर वाले सास-ससुर व पति की सेवा पाठ पढ़ाते हैं...............यह पाठ पढ़ने से मुझे लगता है कि किसी भी प्रकार की समानता या स्वतंत्रता में अन्तर आने वाला नहीं यह जब होता है जब सास-ससुर व पति इसे अनिवार्य मानले और स्वयं सकारात्मक न हो। संस्कारित होना कायरता नहीं......हाँ ठहरी समुद्र की थाह लेने की वो बिल्कु ल ठी क कि अन्याय सहन न करके स्वयं मोती ढ़ूंढने होंगे............... आपकी कविता बहुत अच्छी लगी.......... मैंने भी एक कविता महिला की वात्सविकता पर लिखी है किन्तु लगता है आपको रास नहीं आएगी किन्तु आज का सच यही है...........मेरे ब्लॉग पर पढ़ना चाहो तो उपस्थित है................साधूवाद।

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जिन्न और उसकी मुहँ बोली बहिन की अच्छी कहानी, बहुत अच्छा समापन, हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! ... "वो जिन्न अभी भी मेरी ओर प्रश्नवाचक नज़रों से देख रहा था और मैं सोच में पड़ी थी !रात धीरे धीरे बीत रही थी मैंने जिन्न से कहा देखो जिन्न भाई मेरी एक इच्छा तो आप अभी पूरी कर दो और बाकि जब आपको समय उचित जान पड़े तब कर देना जिन्न अब तक काफी बेचैन हो रहा था यूँही हाथ बाँध कर खड़े उसे बहुत देर हो गयी थी बोला हाँ बहिन जल्दी बताओ ना.मैंने कहा की मेरी पहली इच्छा तो ये है के मेरा देश सुख और समृधि से भरपूर हो जाए.दूसरी इच्छा है की मेरे बच्चे उन्नति की राह पर अग्रसर रहें और तीसरी इच्छा है की जब मेरी मृत्यु हो तो बहुत शांति पूर्वक हो.जिन्न सोच में पद गया और अपनी दाढ़ी खुजाने लगा.."

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